
वाशिंगटन। अफगानिस्तान युद्ध से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों के लीक होने की जांच कर रहे अमेरिकी अधिकारियों ने एक कंप्यूटर विशेषज्ञ को इस बवाल की वजह बनी वेबसाइट विकिलीक्स में घुसपैठ करने के लिए नकद राशि देने की पेशकश की है। ये अधिकारी चाहते हैं कि कंप्यूटर विशेषज्ञ और गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक होने से बचा ले।
'वाशिंगटन पोस्ट' की खबर के अनुसार, और दस्तावेजों को वेबसाइट पर आने से रोकने के लिए जांचकर्ताओं ने बोस्टन इलाके के ब्रेडले ई. मैनिंग के एक परिचित से बातचीत की। मैनिंग ने ही विकिलीक्स को विदेश विभाग का एक वीडियो दिया था। इसमें हेलीकाप्टर से इराक की राजधानी बगदाद में निहत्थे नागरिकों पर हमला करते दिखाया गया है। जिस व्यक्ति से जांचकर्ताओं ने बातचीत की है वह कंप्यूटर विशेषज्ञ है। वह मैनिंग से जनवरी में मिला था। उसने जांचकर्ताओं को कहा कि वह ऐसे किसी भी गोपनीय दस्तावेज के बारे में नहीं जानता। खबर के मुताबिक, इस कंप्यूटर विशेषज्ञ का कहना है कि विकिलीक्स में सेंध लगाने के लिए सेना ने उसे नकद राशि देने की पेशकश की जिसे उसने अस्वीकार कर दिया।
सेना के आपराधिक जांच विभाग के प्रवक्ता क्रिस ग्रे ने इस दावे पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा, 'हमारी जांच-पड़ताल जारी है। हम अपने तौर तरीके और रणनीति पर चर्चा नहीं करना चाहते।' मैनिंग को जानने वाले एक और व्यक्ति से अमेरिकी जांच अधिकारियों ने पूछताछ की।
'कोई मारा गया तो जिम्मेदारी पेंटागन की'
लंदन। विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन एसेंज का कहना है कि लगभग 75 हजार गुप्त युद्ध-दस्तावेजों के लीक होने के कारण यदि किसी भी अफगान मुखबिर की मौत हुई तो इसकी अंतिम जिम्मेदारी अमेरिकी सेना पर होगी। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि विकिलीक्स की वजह से कोई खतरे में पड़ा हो। उन्होंने कहा कि विकिलीक्स ने इस बात का खयाल रखा है कि लोग खतरे में न पड़ें। पिछले हफ्ते अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने एसेंज को गैर जिम्मेदार करार दिया था। अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने भी एसेंज की आलोचना करते हुए कहा था कि उसके हाथ खून से रंगे होंगे।