
भोपाल। अपनी जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए छात्र-छात्राओं को अब हर जगह दसवीं या बारहवीं की मार्कशीट लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट केवल कालेज में प्रवेश के काम आएगी। इसके बाद हर जगह विश्वविद्यालयों की मार्कशीट ही जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर काम आ जाएगी।
राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर की अध्यक्षता में सोमवार को हुई समन्वय समिति ने भी विश्वविद्यालयों की मार्कशीट के नए स्वरूप को मंजूरी दे दी। अब प्रदेश के सभी विवि की मार्कशीट में परीक्षार्थियों के नाम के साथ उनकी फोटो व जन्मतिथि भी प्रिंट की जाएगी। अभी तक केवल बरकतउल्ला विश्वविद्यालय द्वारा अपनी मार्कशीट में परीक्षार्थियों की फोटो छापी जा रही थी। मगर अगली कक्षाओं में प्रवेश, रोजगार कार्यालय में पंजीयन से लेकर नौकरी तक के आवेदन में जन्मतिथि के सत्यापन के लिए छात्र-छात्राओं को अपनी दसवीं की मार्कशीट लगाना पड़ती थी।
जन्मतिथि और फोटो होने से विश्वविद्यालयों की मार्कशीट का महत्व सरकारी कामकाज में भी बढ़ जाएगा। इसी को देखते हुए समन्वय समिति ने मार्कशीटों में बदलाव को मंजूरी दे दी। प्रवेश तिथि बढ़ी, फीस वृद्धि टली : परीक्षा शुल्क सहित अपने सभी दस्तावेजों की फीस बढ़ाने में जुटे विवि के प्रयासों को समन्वय समिति ने विराम दे दिया है। अब अगले सत्र से ही फीस में वृद्धि हो सकेगी। इसी तरह प्रवेश के मामले में भी समन्वय समिति ने छात्रों को राहत दी है। अब सभी कालेजों में 16 अगस्त तक प्रवेश हो सकेंगे। फिलहाल प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी।
गुणवत्ता में सुधार पर राज्यपाल का जोर : राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री ठाकुर ने बैठक मेंउच्च शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने पाठ्यक्रमों को समय की मांग के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। साथ ही विश्वविद्यालय के अध्यादेश एवं परिनियमों में भी एकरूपता लाने के निर्देश दिए। इसके लिए राज्यपाल ने तीन कुलपतियों की मौजूदगी में एक उप-समिति का भी गठन किया है। इस समिति ने बीयू की कुलपति प्रो. निशा दुबे, इंदौर के प्रो. पीके मिश्रा और एपीएस रीवा के कुलपति डॉ. एसएन यादव शामिल हैं। यह समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के लिए प्रशासकीय पदों पर भर्ती और बैकलाग पदों की पूर्ति यथाशीघ्र करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनाने के लिए यूजीसी एवं अन्य केंद्रीय संस्थानों से अधिकाधिक सहयोग लेने पर बल दिया। बैठक में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जयदीप गोविन्द, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा पुखराज मारू, प्रमुख सचिव विधि अशोक कुमार मिश्रा, आयुक्त उच्च शिक्षा राजीव रंजन, वित्ता सचिव मनीष रस्तोगी, राज्यपाल के सचिव जे.एन.मालपानी और अपर सचिव डॉ.जीके सारस्वत व सभी कुलपति शामिल थे।
कोर्ट प्रकरण दबा गए कुलपति : विश्वविद्यालयों के कुलपति और प्रदेश के आला अफसर राज्यपाल को भी गुमराह करने में पीछे नहीं रहते। कुछ ऐसा ही समन्वय समिति की बैठक में सामने आया। राच्यपाल ने विश्वविद्यालयों में रेक्टर,वित्ता नियंत्रक और परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति की कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता से करने कहा। जबकि परीक्षा और वित्ता नियंत्रक के मामले में अदालत का स्थगन है। इसकी जानकारी किसी ने भी राज्यपाल को नहीं दी। जबकि इसी बैठक में राच्यपाल ने न्यायालयीन प्रकरणों के निराकरण पर जोर भी दिया।